हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और यूरोप के कई देशों में हजारों लोगों ने “नो किंग्स” रैलियों के तहत सड़कों पर उतरकर डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और ईरान के खिलाफ युद्ध का जोरदार विरोध किया। इन प्रदर्शनों का सबसे बड़ा आयोजन मिनेसोटा राज्य की राजधानी सेंट पॉल में हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
मिनेसोटा कैपिटल के आसपास हजारों प्रदर्शनकारी एकजुट होकर खड़े रहे। कुछ लोगों ने उल्टे अमेरिकी झंडे लहराए, जो संकट और असंतोष का प्रतीक माने जाते हैं। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक ब्रूस स्पिंगटीन ने भी हिस्सा लिया और एक भावनात्मक गीत प्रस्तुत किया, जो हालिया हिंसा में मारे गए लोगों की याद में था। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जनता का संघर्ष यह साबित करता है कि अमेरिका में लोकतंत्र अब भी जीवित है।
यह विरोध केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में भी लोग शामिल हुए। आयोजकों के अनुसार, देशभर में 50 राज्यों में 3000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और लाखों लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया गया।
प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप प्रशासन की कई नीतियों पर नाराजगी जताई, जिनमें सख्त इमिग्रेशन कानून, ट्रांसजेंडर अधिकारों में कटौती और ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई प्रमुख हैं। वॉशिंगटन डीसी में लोगों ने लिंकन मेमोरियल से नेशनल मॉल तक मार्च किया और “तानाशाही नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाए।
दूसरी ओर, व्हाइट हाउस और रिपब्लिकन नेताओं ने इन प्रदर्शनों को खारिज करते हुए इसे वामपंथी समूहों की साजिश बताया और कहा कि इसका वास्तविक जनसमर्थन नहीं है।
इन रैलियों का असर अमेरिका से बाहर भी देखा गया। यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में भी लोगों ने युद्ध विरोधी प्रदर्शन किए। रोम, लंदन और पेरिस में लोगों ने शांति और मानवाधिकारों के समर्थन में आवाज उठाई।
मिनेसोटा के मुख्य कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया, जिनमें अभिनेता, गायिका, अभिनेत्री और सीनेटर भी शामिल थे।
कुल मिलाकर, यह आंदोलन ट्रंप प्रशासन की नीतियों, खासकर युद्ध और सामाजिक मुद्दों पर लिए गए फैसलों के खिलाफ एक व्यापक जन-असंतोष को दर्शाता है, जिसमें लोग लोकतंत्र, शांति और अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे हैं।
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